मित्रों की यादें तो आती हैं ।
बचपन से जवानी का सफर याद तो आता है ।
गलतियों का सिलसिला बिना किसी अकलमंदी के जारी तो है ।
उस उपरवाले का साथ न होता तो इस दुनिया से कौन बचाता ।
बनाया बी उसने संबआला भी उसने ।
बचपन के मित्र कुछ ज़्यादा याद आते हैं ।
क्योंकी उनकी यादों में हमारा बचपन छुपा होता है ।
सोमवार, 28 सितंबर 2009
कुछ लिखने की कोशिश
मै मै करते ज़िन्दगी एक दिन खो ही जाती है ।
हर पल यूँ ही पल पल करके बीत ही जाता है ।
जब सफर ही है जीवन तो हम सब ठिकानों के बारे में इतना क्यों सोचते हैं ।
गाड़ी जीवन की जिसका ड्राईवर वही है ।
फिर रास्तों की फिकर हम क्यों करते हैं ।
लुत्फ़ तो लेना ही है बस वही तो है ज़िन्दगी ।
खुशी हो या की गम पर लुत्फ़ लेना जरी रहे ।
हर पल यूँ ही पल पल करके बीत ही जाता है ।
जब सफर ही है जीवन तो हम सब ठिकानों के बारे में इतना क्यों सोचते हैं ।
गाड़ी जीवन की जिसका ड्राईवर वही है ।
फिर रास्तों की फिकर हम क्यों करते हैं ।
लुत्फ़ तो लेना ही है बस वही तो है ज़िन्दगी ।
खुशी हो या की गम पर लुत्फ़ लेना जरी रहे ।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)