मित्रों की यादें तो आती हैं ।
बचपन से जवानी का सफर याद तो आता है ।
गलतियों का सिलसिला बिना किसी अकलमंदी के जारी तो है ।
उस उपरवाले का साथ न होता तो इस दुनिया से कौन बचाता ।
बनाया बी उसने संबआला भी उसने ।
बचपन के मित्र कुछ ज़्यादा याद आते हैं ।
क्योंकी उनकी यादों में हमारा बचपन छुपा होता है ।
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मित्रों की यादें तो आती हैं । बचपन से जवानी का सफर याद आता है । गलतियों का सिलसिला याद आता है। lekin in yadon ko snwar kar internet ke hawale kar do swyam ko mukt rkho. yadein aap ka bhojh nahin takat banni chahiye
जवाब देंहटाएंkya bat hai meri tippni itni nakhushgwar lagi ki likhna hi band kar diya
जवाब देंहटाएंगोविन्द जी ,
जवाब देंहटाएंइसे कुछ कवितामय रूप दें ....यह तो पूरा गद्य ही लगता है .....!!