सोमवार, 28 सितंबर 2009

मित्रों की याद

मित्रों की यादें तो आती हैं ।
बचपन से जवानी का सफर याद तो आता है ।
गलतियों का सिलसिला बिना किसी अकलमंदी के जारी तो है ।
उस उपरवाले का साथ न होता तो इस दुनिया से कौन बचाता ।
बनाया बी उसने संबआला भी उसने ।
बचपन के मित्र कुछ ज़्यादा याद आते हैं ।
क्योंकी उनकी यादों में हमारा बचपन छुपा होता है ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. मित्रों की यादें तो आती हैं । बचपन से जवानी का सफर याद आता है । गलतियों का सिलसिला याद आता है। lekin in yadon ko snwar kar internet ke hawale kar do swyam ko mukt rkho. yadein aap ka bhojh nahin takat banni chahiye

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  2. गोविन्द जी ,

    इसे कुछ कवितामय रूप दें ....यह तो पूरा गद्य ही लगता है .....!!

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